झूम खेती (कर्तन-दहन कृषि)–
झूम खेती एक पुरानी खेती की तरीका है जो आज भी भारत के कई हिस्सों में अपनाई जाती है। इसे कर्तन-दहन कृषि भी कहते हैं। परीक्षा में यह विषय बार-बार पूछा जाता है इसलिए इसे ध्यान से पढ़िए।
झूम खेती क्या है-
इसमें पहले जंगल के पेड़-पौधे काटे जाते हैं, फिर उन्हें जला दिया जाता है। जलने के बाद जो राख बचती है वह कुछ समय के लिए मिट्टी को उपजाऊ बना देती है। इसी जमीन पर कुछ साल तक खेती की जाती है। जब जमीन की ताकत कम हो जाती है तब किसान उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह चले जाते हैं और वहाँ फिर से यही काम करते हैं। इसी कारण इसे स्थानांतरित खेती भी कहते हैं।
आसान भाषा में समझिए-
सोचिए किसी जंगल की जमीन को साफ किया गया।
पहले पेड़ काटे गए, फिर सूखी लकड़ी और पौधों को जलाया गया।
जलने के बाद जो राख बची उसने मिट्टी को कुछ समय के लिए उपजाऊ बना दिया।
इसी जमीन पर दो से तीन साल तक खेती की गई।
फिर मिट्टी कमजोर हो गई तो किसान नई जगह चला गया।
यही झूम खेती है।
झूम खेती की खास बातें-
यह खेती जंगल वाले इलाकों में होती है।
इसमें जमीन बार-बार बदली जाती है।
यह ज्यादा समय तक एक ही जगह नहीं चलती।
इसमें खाद या उर्वरक बहुत कम या नहीं के बराबर इस्तेमाल होता है।
यह खेती आमतौर पर आदिवासी और पहाड़ी इलाकों में की जाती है।
खेती पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर रहती है।
क्यों की जाती है
यह खेती वहाँ की जाती है जहाँ समतल जमीन कम हो, जंगल ज्यादा हों और खेती के लिए आधुनिक साधन उपलब्ध न हों। पहाड़ी इलाकों में आधुनिक यंत्र नहीं पहुँच पाते इसलिए वहाँ के लोग इसी पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं।
फायदे-
बिना ज्यादा साधनों के खेती हो जाती है।
जंगल की राख से कुछ समय के लिए मिट्टी अच्छी हो जाती है।
सीमित संसाधनों में परिवार का पेट भर जाता है।
यह आदिवासी समाज की पुरानी परंपरा और पहचान से जुड़ी है।
नुकसान-
इससे पेड़ कटते हैं और जंगल कम होते हैं।
मिट्टी जल्दी खराब हो जाती है।
पर्यावरण को नुकसान होता है।
जंगली जानवरों का घर नष्ट होता है।
भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
एक ही जगह पर लंबे समय तक खेती नहीं हो पाती इसलिए किसान हमेशा अस्थायी जीवन जीता है।

भारत में कहाँ होती है-
- झूम खेती भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा होती है।
- असम, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश — इन सभी राज्यों में यह पद्धति प्रचलित है।
- इसके अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के आदिवासी इलाकों में भी यह देखने को मिलती है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में नाम-
- असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड → झूम
- मणिपुर → पामलू
- बस्तर (छत्तीसगढ़) और अंडमान-निकोबार → दीपा
- मध्य प्रदेश → बेवर या दहिया
- आंध्र प्रदेश → पोडु या पेंडा
- ओडिशा → पामाडाबी, कोमान या बरीगाँव
- पश्चिमी घाट → कुमारी
- दक्षिण-पूर्वी राजस्थान → वालरे या वाल्टरे
- हिमालयी क्षेत्र → खिल
- झारखंड → कुरुवा
दुनिया के देशों में नाम-
- मैक्सिको और मध्य अमेरिका → मिल्पा
- वेनेजुएला → कोनुको
- ब्राज़ील → रोका
- मध्य अफ्रीका → मसोले
- इंडोनेशिया → लदांग
- वियतनाम → रे
सरकार का रुख-
भारत सरकार झूम खेती को धीरे-धीरे कम करना चाहती है क्योंकि इससे जंगल कट रहे हैं। सरकार इन इलाकों में स्थायी खेती, बागवानी और वन-आधारित रोजगार को बढ़ावा दे रही है ताकि आदिवासी किसानों को बेहतर विकल्प मिल सके।
🧠याद करने का तरीका:
काटो → जलाओ → बोओ → छोड़ो
यही झूम खेती का पूरा तरीका है।
परीक्षा के लिए याद रखिए:
- झूम खेती के 10 महत्वपूर्ण तथ्य
- झूम खेती को कर्तन-दहन कृषि भी कहते हैं।
- अंग्रेजी में इसे Slash and Burn Agriculture कहते हैं।
- यह एक स्थानांतरित खेती है — किसान जमीन बदलता रहता है।
- जली हुई राख से मिट्टी कुछ समय के लिए उपजाऊ हो जाती है।
- भारत में यह सबसे ज्यादा पूर्वोत्तर राज्यों में होती है।
- मिजोरम में इसे झूम, मणिपुर में पामलू और मध्य प्रदेश में बेवर कहते हैं।
- इंडोनेशिया में इसे लदांग और ब्राज़ील में रोका कहते हैं।
- इससे वनों की कटाई और मिट्टी का क्षरण होता है।
- भारत सरकार इस खेती को धीरे-धीरे कम करना चाहती है।
अभ्यास प्रश्न (FAQ) –
- झूम खेती को अंग्रेजी में क्या कहते हैं ? (SSC CGL / CHSL)
(a) Wet Agriculture
(b) Slash and Burn Agriculture
(c) Terrace Agriculture
(d) Mixed Agriculture
उत्तर: (b) Slash and Burn Agriculture
2. झूम खेती मुख्य रूप से भारत के किस क्षेत्र में की जाती है ? (RRB NTPC / Group D)
(a) पश्चिमी राजस्थान
(b) दक्षिणी तमिलनाडु
(c) पूर्वोत्तर राज्य
(d) उत्तरी पंजाब
उत्तर: (c) पूर्वोत्तर राज्य
3. निम्नलिखित में से कौन सा कथन झूम खेती के बारे में सही है ? (UPSC Prelims)
(a) यह स्थायी खेती की पद्धति है
(b) इसमें रासायनिक खाद का अधिक उपयोग होता है
(c) यह स्थानांतरित खेती है जिसमें जमीन बदलती रहती है
(d) यह केवल मैदानी इलाकों में होती है
उत्तर: (c) यह स्थानांतरित खेती है जिसमें जमीन बदलती रहती है
4. झूम खेती से मिट्टी कुछ समय के लिए उपजाऊ क्यों हो जाती है ? (State PSC)
(a) सिंचाई के कारण
(b) रासायनिक खाद के कारण
(c) जली हुई राख के कारण
(d) नई मिट्टी आने के कारण
उत्तर: (c) जली हुई राख के कारण
5. मध्य प्रदेश में झूम खेती को क्या कहते हैं ? (Banking (IBPS / SBI)
(a) पामलू
(b) बेवर या दहिया
(c) कुमारी
(d) कुरुवा
उत्तर: (b) बेवर या दहिया
6. निम्नलिखित में से कौन सा झूम खेती का सबसे बड़ा नुकसान है ? (CTET / TET)
(a) फसल अच्छी होती है
(b) वनों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान
(c) किसान एक जगह रहता है
(d) मिट्टी हमेशा उपजाऊ रहती है
उत्तर: (b) वनों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान
7. इंडोनेशिया में झूम खेती को क्या कहते हैं ? [Defence (NDA / CDS / Agniveer)]
(a) रोका
(b) मिल्पा
(c) लदांग
(d) मसोले
उत्तर: (c) लदांग
8. निम्नलिखित में से कौन सा राज्य झूम खेती के लिए सबसे अधिक जाना जाता है ? (Police / Constable / SI)
(a) पंजाब
(b) मिजोरम
(c) गुजरात
(d) राजस्थान
उत्तर: (b) मिजोरम
एक पंक्ति में
झूम खेती वह खेती है जिसमें जंगल साफ करके कुछ साल खेती की जाती है, फिर जमीन कमजोर होने पर छोड़ दी जाती है।
अस्वीकरण:
यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए है। परीक्षा में बैठने से पहले छात्र अपने संबंधित परीक्षा के आधिकारिक पाठ्यक्रम और मानक पुस्तकों से भी अध्ययन करें। Saieducare11 किसी भी परीक्षा परिणाम की गारंटी नहीं देता। सफलता छात्र की अपनी मेहनत और लगन पर निर्भर करती है।
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