
अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा भारतीय संविधान का वह आधारभूत अनुच्छेद है जो मौलिक अधिकारों की रक्षा का पहला कदम है। — लेकिन ये अधिकार किसके खिलाफ मिले हैं, यह तय करता है अनुच्छेद 12। यह वह आधारभूत अनुच्छेद है जो यह निश्चित करता है कि मौलिक अधिकार किन-किन संस्थाओं के विरुद्ध लागू होंगे। SSC CGL, UPSC, State PSC और Banking परीक्षाओं में इससे हर साल प्रश्न पूछे जाते हैं।
अनुच्छेद 12 आया कहाँ से? — पृष्ठभूमि समझो
1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, तब संविधान सभा के सामने एक बड़ा सवाल था — मौलिक अधिकार दिए तो जाएंगे, लेकिन इनका उल्लंघन कोई करेगा तो नागरिक किसके खिलाफ कोर्ट जाएगा?
अगर “राज्य” की परिभाषा नहीं होती, तो सरकार एक नई संस्था बनाकर उसके ज़रिए नागरिकों के अधिकार छीन सकती थी और कह सकती थी — “यह तो हम नहीं, यह तो अलग संस्था है।” इसी चाल को रोकने के लिए अनुच्छेद 12 बनाया गया। सरल शब्दों में — अनुच्छेद 12 सरकार को “नकली दरवाज़े” से बचकर निकलने से रोकता है।
अनुच्छेद 12 क्या कहता है? (सरल भाषा में)
भारतीय संविधान के भाग 3 में जहाँ भी “राज्य” शब्द आता है — वहाँ उसका मतलब सिर्फ राज्य सरकार नहीं है। अनुच्छेद 12 के अनुसार “राज्य” में यह सब शामिल हैं:
- भारत सरकार और संसद
- सभी राज्य सरकारें और उनके विधानमंडल
- सभी स्थानीय प्राधिकारी
- अन्य सभी प्राधिकारी — जो सरकारी काम करते हों या जिन पर सरकार का नियंत्रण हो
यानी अगर इनमें से कोई भी आपके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे — तो आप सीधे सुप्रीम कोर्ट (अनुच्छेद 32) या हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) जा सकते हैं।
अनुच्छेद 12 के तहत राज्य में कौन-कौन शामिल है?
1. केंद्र सरकार और संसद
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल, लोकसभा और राज्यसभा — ये सब “राज्य” हैं। इनके किसी भी निर्णय को मौलिक अधिकारों के आधार पर कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
2. राज्य सरकारें और विधानमंडल
देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभाएँ — सब “राज्य” की परिभाषा में आते हैं।
3. स्थानीय प्राधिकारी (Local Authorities)
वे संस्थाएँ जिनके पास कानून बनाने या टैक्स वसूलने की शक्ति हो — जैसे नगरपालिका, नगर निगम, ग्राम पंचायत, जिला बोर्ड, छावनी बोर्ड। परीक्षा में यह पूछा जाता है कि “Local Authority” का मुख्य आधार क्या है — उत्तर है: कानून बनाने या टैक्स लगाने की शक्ति।
4. अन्य प्राधिकारी (Other Authorities) — सबसे महत्वपूर्ण
यह सबसे विवादित और परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला भाग है। संविधान में “Other Authorities” की कोई सटीक परिभाषा नहीं दी गई — इसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों से परिभाषित किया। LIC, ONGC, SAIL, FCI जैसी सरकारी कंपनियाँ इसी श्रेणी में आती हैं।
“Other Authorities” कैसे पहचानें? — Court का तीन-शर्त फार्मूला
अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा के अनुसार “Other Authorities” सबसे महत्वपूर्ण और परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला भाग है। सुप्रीम कोर्ट ने रमाना दयाराम शेट्टी केस (1979) में तीन शर्तें बताईं। अगर कोई संस्था इन तीनों को पूरा करे — तो वह “राज्य” है:
- सरकारी वित्त पोषण: क्या संस्था का पैसा सरकार से आता है?
- सरकारी कार्य: क्या संस्था वह काम कर रही है जो सामान्यतः सरकार करती है?
- सरकारी नियंत्रण: क्या सरकार उसके बोर्ड, नियुक्तियों और नीतियों को नियंत्रित करती है?
तीनों हाँ — तो “राज्य”। एक भी नहीं — तो “राज्य” नहीं।
BCCI “राज्य” क्यों नहीं है — Logic समझो
अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा के अनुसार BCCI तीनों शर्तें पूरी नहीं करती इसलिए वह राज्य नहीं है। यह सवाल बार-बार परीक्षा में आता है और छात्र अक्सर confuse होते हैं। BCCI भारत में क्रिकेट चलाती है — यह बड़ा काम है। फिर भी वह “राज्य” नहीं है — क्यों?
- BCCI को सरकार से कोई पैसा नहीं मिलता — यह खुद कमाती है।
- क्रिकेट चलाना सरकार का संवैधानिक काम नहीं है।
- BCCI के बोर्ड और अध्यक्ष का चुनाव सरकार नहीं करती।
तीनों शर्तें विफल — इसलिए BCCI “राज्य” नहीं है।
अब LIC को देखो — सरकार का पैसा, सरकार की नियुक्तियाँ, बीमा जैसी सार्वजनिक सेवा — तीनों शर्तें पूरी — इसलिए LIC “राज्य” है।
कौन राज्य है और कौन नहीं — एक नज़र में
| संस्था | राज्य है? | कारण |
|---|---|---|
| पुलिस विभाग | हाँ | सीधे सरकार का हिस्सा |
| सरकारी स्कूल / कॉलेज | हाँ | सरकारी वित्त और नियंत्रण |
| LIC | हाँ | सरकारी उपक्रम, तीनों शर्तें पूरी |
| ONGC / SAIL / FCI | हाँ | सरकारी कंपनियाँ |
| न्यायपालिका (प्रशासनिक कार्य में) | हाँ | भर्ती जैसे प्रशासनिक काम में |
| BCCI | नहीं | निजी संस्था, तीनों शर्तें विफल |
| Reliance / Tata | नहीं | निजी कंपनियाँ |
| निजी बैंक (HDFC, ICICI) | नहीं | सरकारी एजेंट नहीं |
| निजी विश्वविद्यालय | नहीं | सरकारी नियंत्रण नहीं |
न्यायपालिका “राज्य” कब होती है और कब नहीं? — Exam Trap
यह सबसे बड़ा Exam Trap है। छात्र अक्सर सोचते हैं — कोर्ट तो स्वतंत्र है, इसलिए “राज्य” नहीं है। यह गलत है।
- जब राज्य है: जब कोर्ट प्रशासनिक काम करे — जैसे कर्मचारियों की भर्ती, तबादला, सेवा शर्तें — तब वह “राज्य” है और उसके निर्णय को चुनौती दी जा सकती है।
- जब राज्य नहीं है: जब कोर्ट न्यायिक काम करे — यानी फैसला सुनाए — तब वह “राज्य” नहीं है। क्योंकि तब वह एक अलग संवैधानिक शक्ति के रूप में काम कर रहा होता है।
महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Landmark Cases)
रमाना दयाराम शेट्टी बनाम इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी (1979)
इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक ठेका दिया। शेट्टी ने कहा — यह भेदभाव है, मेरे समानता के अधिकार का उल्लंघन है। पहला सवाल था — क्या एयरपोर्ट अथॉरिटी “राज्य” है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा — हाँ, क्योंकि यह सरकारी काम करती है, सरकारी पैसे से चलती है और सरकार का इस पर नियंत्रण है। इसी केस में पहली बार “Other Authorities” का तीन-शर्त फार्मूला आया जो आज भी लागू है।
अजय हसिया बनाम खालिद मुजीब (1981)
एक इंजीनियरिंग कॉलेज को अनुदान मिलता था और सरकार उसके नियम तय करती थी। छात्र ने कहा — दाखिला प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। कोर्ट ने कहा — यह कॉलेज “राज्य” है क्योंकि सरकार इतना नियंत्रण रखती है कि कॉलेज सरकार की इच्छा के बिना कुछ नहीं कर सकता। इस केस ने रमाना शेट्टी फार्मूले को और मज़बूत किया।
अनुच्छेद 12 का असली महत्व — बड़ी तस्वीर
अनुच्छेद 12 सिर्फ परिभाषा नहीं है — यह मौलिक अधिकारों की नींव है। इसके बिना भाग 3 के सारे अधिकार कागज़ पर ही रहते।
- अनुच्छेद 14 (समानता) तभी काम करता है जब हम जानें कि किसके खिलाफ समानता माँगनी है।
- अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता) तभी लागू होगा जब पता हो कि “राज्य” ने स्वतंत्रता छीनी है।
- अनुच्छेद 32 (सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार) तभी मिलेगा जब उल्लंघन करने वाला “राज्य” हो।
इसीलिए परीक्षा में अनुच्छेद 12 को “Gateway to Fundamental Rights” भी कहा जाता है।
अनुच्छेद 12 बनाम अनुच्छेद 13 — तुलना
| बिंदु | अनुच्छेद 12 | अनुच्छेद 13 |
|---|---|---|
| विषय | राज्य की परिभाषा | कानून की वैधता |
| उद्देश्य | किसके खिलाफ अधिकार मिलेंगे | कौन सा कानून मान्य होगा |
| मुख्य बात | राज्य = सरकार + सरकारी संस्थाएँ | विरोधी कानून शून्य होगा |
| परीक्षा में | राज्य में कौन आता है | Judicial Review का आधार |

परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Practice MCQ)
प्रश्न 1: अनुच्छेद 12 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन ‘राज्य’ नहीं है?
(A) LIC (B) ONGC (C) BCCI (D) नगरपालिका
उत्तर: (C) BCCI — निजी संस्था है, तीनों शर्तें विफल।
प्रश्न 2: “Other Authorities” का तीन-शर्त फार्मूला किस केस में आया?
(A) गोलकनाथ केस (B) रमाना शेट्टी केस (C) केशवानंद भारती केस (D) अजय हसिया केस
उत्तर: (B) रमाना दयाराम शेट्टी केस (1979)
प्रश्न 3: अनुच्छेद 12 किस भाग में है?
(A) भाग 2 (B) भाग 3 (C) भाग 4 (D) भाग 5
उत्तर: (B) भाग 3 — मौलिक अधिकार
प्रश्न 4: न्यायपालिका किस स्थिति में “राज्य” मानी जाती है?
(A) फैसला सुनाते समय (B) कानून बनाते समय (C) प्रशासनिक कार्य करते समय (D) कभी नहीं
उत्तर: (C) प्रशासनिक कार्य करते समय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या प्राइवेट बैंक “राज्य” हैं?
नहीं। HDFC, ICICI जैसे निजी बैंक “राज्य” नहीं हैं क्योंकि उन पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। लेकिन SBI, PNB जैसे सरकारी बैंक “राज्य” हैं।
क्या 100% सरकारी वित्त पोषित निजी संस्था “राज्य” मानी जाएगी?
हाँ — रमाना शेट्टी केस (1979) के अनुसार अगर कोई संस्था सरकारी वित्त पोषित हो, सरकारी कार्य करती हो और सरकार का गहरा नियंत्रण हो — तो वह “राज्य” मानी जाएगी, भले ही कागज़ पर वह “निजी” हो।
क्या अनुच्छेद 12 सिर्फ केंद्र सरकार पर लागू होता है ?
नहीं। अनुच्छेद 12 केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और अन्य सरकारी संस्थाएँ — सभी पर लागू होता है। अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा हर उस छात्र को पता होनी चाहिए जो UPSC, SSC या State PSC की तैयारी कर रहा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा को समझे बिना मौलिक अधिकारों की तैयारी अधूरी है। यह अनुच्छेद सिर्फ एक परिभाषा नहीं है — यह वह दरवाज़ा है जिससे होकर नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट तक पहुँच सकता है।
तीन बातें हमेशा याद रखें — पहली, “राज्य” का मतलब सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि हर वह संस्था जो सरकारी काम करती हो। दूसरी, “Other Authorities” की पहचान रमाना शेट्टी केस के तीन-शर्त फार्मूले से होती है। तीसरी, BCCI जैसी बड़ी संस्था भी “राज्य” नहीं है क्योंकि वह तीनों शर्तें पूरी नहीं करती।
अनुच्छेद 12 को एक बार सही से समझ लो — फिर अनुच्छेद 13, 14, 19 और 32 अपने आप आसान लगने लगेंगे क्योंकि सबकी नींव यही है।
भारतीय संविधान का मूल पाठ यहाँ पढ़ें।
अस्वीकरण:
यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कानूनी जानकारी में बदलाव संभव है, अतः आधिकारिक स्रोतों से मिलान अवश्य करें।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 13: मौलिक अधिकारों का ‘बॉडीगार्ड’